Sunday, January 31, 2010

Rajnigandha

A beautiful song... lyrical, soft, loving.... with an unimaginative video!

Sunya Sunya

Jivalaga...

I love this song:



जिवलगा, राहिले रे दूर घर माझे
पाऊल थकले, माथ्यावरचे जड झाले ओझे

किर्र बोलते घन वनराई
सांज सभोवती दाटून येई
सुख सुमनांची सरली माया पाचोळा वाजे

गाव मागचा मागे पडला
पायतळी पथ तिमिरी बुडला
ही घटकेची सुटे सराई, मिटले दरवाजे

निराधार मी, मी वनवासी
घेशील केव्हा मज हृदयासी
तूच एकला नाथ अनाथा, महिमा तव गाजे


Umm, am not sure whether anyone follows this blog anymore and whether I should bother translating this. :) Advantages of being an erratic blogger :D

Thursday, September 17, 2009

Fun song

Just saw the movie Jungle Book with Arul. It was nice :) and he laughed his heart out.

A fun song from a fun movie.

Saturday, September 5, 2009

Wonderful!

Now that its gotten too serious... some guitar from Clapton.

हम भी खो गए

वेहम-ओ-गुमान से दूर दूर
यकीन की हद के पास पास
दिल को भरम यह हो गया
उनको हम से प्यार है


Thats how love stories begin...

Some songs I love. I wish they could come without the videos...

This one is from Kagaz ke Phoon written by Kaifi Azmi by Geeta Dutt.



...तुम भी खो गए, हम भी खो गए
एक राह पर चल के दो कदम...

...बुन रहे है दिन, ख्वाब दम-बा-दम...

Then Gulzaar from Masoom. I like Lata's rendition better, but canot find it.



...ज़िन्दगी तेरे गम ने हमें रिश्ते नए समझाये
मिले जो हमें धुप मैं मिले छाँव के ठंडे साए...

And Gulzaar again from Aandhi...




And Kaifi Azmi...

क्या ले के मिलें अब दुनिया से, आंसू के सिवा कुछ पास नहीं
या फूल ही फूल थे दामन में, या काँटों की भी आस नहीं

वक़्त है महरबान, आरजू है जवान
फ़िक्र कल की करें, इतनी फुर्सत कहाँ
दौर ये चलता रहे, रंग उछलता रहे
रूप मचलता रहे, जाम बदलता रहे

रात भर महमान हैं बहारें यहाँ
रात गर ढल गयी फिर ये खुशियाँ कहाँ
पल भर की खुशियाँ हैं सारी
बढ़ने लगी बेक़रारी

उड़ जा प्यासे भंवरे, रस ना मिलेगा खारों में
कागज़ के फूल जहां खिलते हैं, बैठ ना उन गुलज़ारों में
नादान तमन्ना रेती में, उम्मीद की कश्ती कहेती है

बिछडे सभी बारी बारी

कुछ इश्क किया

कुछ इश्क किया, कुछ काम किया
वोह लोग बहुत खुश किस्मत थे
जो इश्क को काम समझते थे
या काम से आशिकी करते थे
हम जीते जी मशरूफ रहे
कुछ इश्क किया, कुछ काम किया
कम इश्क के आरय आता रहा
और इश्क से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आकर हम ने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया


Faiz again...